श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  8.31.70 
संजय उवाच
एवमुक्तस्तव सुत: कर्णेनाहवशोभिना।
सम्पूज्य सम्प्रहृष्टात्मा ततो राधेयमब्रवीत्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! युद्ध में निपुण कर्ण के ऐसा कहने पर आपका पुत्र दुर्योधन प्रसन्न हुआ। फिर उसने राधापुत्र कर्ण का पूर्ण सम्मान किया और उससे कहा - हे राजन!
 
Sanjaya says - O King! Your son Duryodhan was pleased when Karna, who is adept in battle, said this. Then he honoured Radha's son Karna completely and said to him. 70.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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