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mahabharat 8.31.65-66h: ऐसी व्यवस्था करके जब मैं रथ पर बैठूँगा, तो सभी गुणों में अर्जुन से आगे निकल जाऊँगा। हे कुरुश्रेष्ठ! तब मैं युद्ध में अर्जुन को अवश्य ही परास्त कर दूँगा। इन्द्र सहित समस्त देवता भी मेरा सामना नहीं कर पाएँगे।   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  8.31.65-66h 
एवं कृते रथस्थोऽहं गुणैरभ्यधिकोऽर्जुनात्।
भवे युधि जयेयं च फाल्गुनं कुरुसत्तम॥ ६५॥
समुद्यातुं न शक्ष्यन्ति देवा अपि सवासवा:।
 
 
अनुवाद
ऐसी व्यवस्था करके जब मैं रथ पर बैठूँगा, तो सभी गुणों में अर्जुन से आगे निकल जाऊँगा। हे कुरुश्रेष्ठ! तब मैं युद्ध में अर्जुन को अवश्य ही परास्त कर दूँगा। इन्द्र सहित समस्त देवता भी मेरा सामना नहीं कर पाएँगे।
 
After making such arrangements, when I sit in the chariot, I will surpass Arjuna in all qualities. O best of the Kurus! Then I will surely defeat Arjuna in the war. Even all the gods including Indra will not be able to face me. 65 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)