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mahabharat 8.31.64: अश्वविद्या में भी शल्य के समान कोई नहीं है। शल्य के सारथी होने पर मेरा रथ अर्जुन के रथ से भी आगे निकल जाएगा। 64.   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  8.31.64 
तथा शल्यसमो नास्ति हयज्ञाने हि कश्चन।
सोऽयमभ्यधिक: कृष्णाद् भविष्यति रथो मम॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
अश्वविद्या में भी शल्य के समान कोई नहीं है। शल्य के सारथी होने पर मेरा रथ अर्जुन के रथ से भी आगे निकल जाएगा। 64.
 
Even in the science of horsemanship, no one is equal to Shalya. With Shalya as the charioteer, my chariot will surpass Arjuna's. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)