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mahabharat 8.31.63: शारीरिक बल में मद्रराज शल्य की बराबरी करनेवाला कोई नहीं है। उसी प्रकार शस्त्रविद्या में भी मेरे समान कोई धनुर्धर नहीं है ॥ 63॥   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  8.31.63 
बाहुवीर्ये समो नास्ति मद्रराजस्य कश्चन।
तथास्त्रे मत्समो नास्ति कश्चिदेव धनुर्धर:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
शारीरिक बल में मद्रराज शल्य की बराबरी करनेवाला कोई नहीं है। उसी प्रकार शस्त्रविद्या में भी मेरे समान कोई धनुर्धर नहीं है ॥ 63॥
 
There is no one who can equal Madra king Shalya in physical strength. Similarly, there is no archer like me in the knowledge of weapons. ॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)