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mahabharat 8.31.62: जैसे शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले दशार्हवंशी श्रीकृष्ण अश्वविद्या के रहस्यों को जानते हैं, उसी प्रकार महारथी शल्य भी अश्वविद्या में निपुण हैं ॥62॥   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  8.31.62 
यथाश्वहृदयं वेद दाशार्ह: परवीरहा।
तथा शल्यो विजानीते हयज्ञानं महारथ:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
जैसे शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले दशार्हवंशी श्रीकृष्ण अश्वविद्या के रहस्यों को जानते हैं, उसी प्रकार महारथी शल्य भी अश्वविद्या में निपुण हैं ॥62॥
 
Just as Dasharhavanshi Shri Krishna, who killed the enemy warriors, knows the secrets of horse science, in the same way, Maharathi Shalya is also an expert in horse science. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)