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mahabharat 8.31.61: यदि ऐसी व्यवस्था हो जाए, तो मैं गुणों में पार्थ से भी श्रेष्ठ हो जाऊँगा। शल्य भी श्रीकृष्ण से श्रेष्ठ हैं और मैं भी अर्जुन से श्रेष्ठ हूँ। 61।   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  8.31.61 
एवमभ्यधिक: पार्थाद् भविष्यामि गुणैरहम्।
शल्योऽप्यभ्यधक: कृष्णादर्जुनादपि चाप्यहम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
यदि ऐसी व्यवस्था हो जाए, तो मैं गुणों में पार्थ से भी श्रेष्ठ हो जाऊँगा। शल्य भी श्रीकृष्ण से श्रेष्ठ हैं और मैं भी अर्जुन से श्रेष्ठ हूँ। 61।
 
If such arrangements are made, I will surpass Partha in virtues. Shalya is also superior to Sri Krishna and I am also superior to Arjuna. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)