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mahabharat 8.31.6: संजय ने कहा, "हे राजन! कौरव सैनिक बाणों से घायल होकर, अंग-भंग होकर, अपने वाहनों से अलग हो गए थे। उनके कवच, अस्त्र-शस्त्र और वाहन नष्ट हो गए थे। उनके स्वरों में विवशता थी। वे अभिमानी कौरव अपने शत्रुओं से पराजित होकर हृदय में अत्यंत दुःखी हो रहे थे।"   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.31.6 
संजय उवाच
हतप्रहतविध्वस्ता विवर्मायुधवाहना:।
दीनस्वरा दूयमाना मानिन: शत्रुनिर्जिता:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "हे राजन! कौरव सैनिक बाणों से घायल होकर, अंग-भंग होकर, अपने वाहनों से अलग हो गए थे। उनके कवच, अस्त्र-शस्त्र और वाहन नष्ट हो गए थे। उनके स्वरों में विवशता थी। वे अभिमानी कौरव अपने शत्रुओं से पराजित होकर हृदय में अत्यंत दुःखी हो रहे थे।"
 
Sanjaya said— O King! The Kaurava soldiers were wounded by arrows, were dismembered and were separated from their vehicles. Their armour, weapons and vehicles were destroyed. There was helplessness in their voices. Those proud Kauravas were feeling very sad in their hearts due to being defeated by their enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)