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mahabharat 8.31.58: सचमुच, युद्ध में तेजस्वी ये राजा शल्य भगवान श्रीकृष्ण के समान हैं। यदि ये मेरे सारथी बन सकें, तो तुम्हारी विजय निश्चित है॥58॥   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  8.31.58 
अयं तु सदृश: शौरे: शल्य: समितिशोभन:।
सारथ्यं यदि मे कुर्याद् ध्रुवस्ते विजयो भवेत्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
सचमुच, युद्ध में तेजस्वी ये राजा शल्य भगवान श्रीकृष्ण के समान हैं। यदि ये मेरे सारथी बन सकें, तो तुम्हारी विजय निश्चित है॥58॥
 
Indeed, this king Shalya, who shines in battle, is like Lord Krishna. If he can act as my charioteer, then your victory is certain. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)