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mahabharat 8.31.57: श्रीकृष्ण जगत के रचयिता हैं। वे अर्जुन के रथ की रक्षा करते हैं। इन सब गुणों से रहित होने के कारण मैं पाण्डुपुत्र अर्जुन से युद्ध करना चाहता हूँ। 57.   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  8.31.57 
कृष्णश्च स्रष्टा जगतो रथं तमभिरक्षति।
एतैर्द्रव्यैरहं हीनो योद्धुमिच्छामि पाण्डवम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण जगत के रचयिता हैं। वे अर्जुन के रथ की रक्षा करते हैं। इन सब गुणों से रहित होने के कारण मैं पाण्डुपुत्र अर्जुन से युद्ध करना चाहता हूँ। 57.
 
Sri Krishna is the creator of the world. He protects Arjuna's chariot. Being devoid of these things, I desire to fight with Arjuna, son of Pandu. 57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)