Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.31.55-56: सबके पूज्य, दशार्हवंशी पुत्र श्रीकृष्ण अपने घोड़ों की लगाम संभालते हैं । वीर ! उनके पास अग्नि द्वारा प्रदत्त सुवर्ण से विभूषित दिव्य रथ है, जो किसी भी प्रकार से नष्ट नहीं हो सकता । उनके घोड़े भी मन के समान वेगवान हैं । उनकी सुशोभित ध्वजा दिव्य है, जिस पर सबको विस्मित करने वाला एक वानर विराजमान है ॥ 55-56॥ | mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सबके पूज्य, दशार्हवंशी पुत्र श्रीकृष्ण अपने घोड़ों की लगाम संभालते हैं । वीर ! उनके पास अग्नि द्वारा प्रदत्त सुवर्ण से विभूषित दिव्य रथ है, जो किसी भी प्रकार से नष्ट नहीं हो सकता । उनके घोड़े भी मन के समान वेगवान हैं । उनकी सुशोभित ध्वजा दिव्य है, जिस पर सबको विस्मित करने वाला एक वानर विराजमान है ॥ 55-56॥
Sri Krishna, the son of the Dasarha clan, who is revered by all, takes care of the reins of his horses. Brave! He has a divine chariot decorated with gold given by Agni, which cannot be destroyed by any means. His horses are also as swift as the mind. His illustrious flag is divine, on which sits a monkey who amazes everyone. ॥ 55-56॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥