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mahabharat 8.31.54: हे राजन! धनुष के विषय में तो मैं अर्जुन से श्रेष्ठ हूँ; किन्तु यह भी सुनिए कि पराक्रमी पाण्डुपुत्र अर्जुन मुझसे क्यों श्रेष्ठ है।   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  8.31.54 
तत्राहमधिक: पार्थाद् धनुषा तेन पार्थिव।
येन चाप्यधिको वीर: पाण्डवस्तन्निबोध मे॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! धनुष के विषय में तो मैं अर्जुन से श्रेष्ठ हूँ; किन्तु यह भी सुनिए कि पराक्रमी पाण्डुपुत्र अर्जुन मुझसे क्यों श्रेष्ठ है।
 
O King! As far as the bow is concerned, I am superior to Arjuna; but listen to the reason why the valiant son of Pandu, Arjuna, surpasses me. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)