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mahabharat 8.31.48: दुर्योधन! आज मैं रणभूमि में विजयी पुरुषों में श्रेष्ठ वीर अर्जुन को मारकर तुम्हें तुम्हारे बन्धुओं सहित सुखी कर दूँगा॥48॥   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  8.31.48 
अद्य दुर्योधनाहं त्वां नन्दयिष्ये सबान्धवम्।
निहत्य समरे वीरमर्जुनं जयतां वरम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन! आज मैं रणभूमि में विजयी पुरुषों में श्रेष्ठ वीर अर्जुन को मारकर तुम्हें तुम्हारे बन्धुओं सहित सुखी कर दूँगा॥48॥
 
Duryodhana! Today I will make you happy along with your relatives by killing the brave Arjuna, the best of the victorious men in the battlefield. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)