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mahabharat 8.31.46: परशुराम द्वारा दिया गया वह भयंकर धनुष गांडीव से भी श्रेष्ठ है। यह वही धनुष है जिससे परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी पर विजय प्राप्त की थी।   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  8.31.46 
धनुर्घोरं रामदत्तं गाण्डीवात् तद् विशिष्यते।
त्रिस्सप्तकृत्व: पृथिवी धनुषा येन निर्जिता॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
परशुराम द्वारा दिया गया वह भयंकर धनुष गांडीव से भी श्रेष्ठ है। यह वही धनुष है जिससे परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी पर विजय प्राप्त की थी।
 
That fierce bow given by Parashurama is superior to Gandiva. This is the same bow with which Parashurama had conquered the earth twenty-one times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)