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mahabharat 8.31.41: हे भारत! शारीरिक बल, पराक्रम, अस्त्र-शस्त्र विद्या, पराक्रम और शत्रुओं को जीतने के उपाय जानने में सव्यसाची अर्जुन भी मेरी बराबरी नहीं कर सकता ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.31.41 
प्राणे शौर्येऽथ विज्ञाने विक्रमे चापि भारत।
निमित्तज्ञानयोगे च सव्यसाची न मत्सम:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! शारीरिक बल, पराक्रम, अस्त्र-शस्त्र विद्या, पराक्रम और शत्रुओं को जीतने के उपाय जानने में सव्यसाची अर्जुन भी मेरी बराबरी नहीं कर सकता ॥ 41॥
 
Bhaarat! Even in physical strength, valour, knowledge of weapons, valour and in finding ways to conquer enemies, even Savyasachi Arjuna cannot match me. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)