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mahabharat 8.31.4: घोषयात्रा के समय दुर्योधन तथा भरतवंश के अन्य सदस्यों की रक्षा अकेले अर्जुन ने ही की थी। उसने अकेले ही अपने पराक्रम से भगवान शिव को प्रसन्न किया था और उस प्रचण्ड एवं शक्तिशाली योद्धा ने अकेले ही (विराटनगर में) कौरव सेना के समस्त राजाओं को परास्त किया था।   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.31.4 
एको ह्यरक्षद् भरतानेको भवमतोषयत्।
तेनैकेन जिता: सर्वे महीपा ह्युग्रतेजसा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
घोषयात्रा के समय दुर्योधन तथा भरतवंश के अन्य सदस्यों की रक्षा अकेले अर्जुन ने ही की थी। उसने अकेले ही अपने पराक्रम से भगवान शिव को प्रसन्न किया था और उस प्रचण्ड एवं शक्तिशाली योद्धा ने अकेले ही (विराटनगर में) कौरव सेना के समस्त राजाओं को परास्त किया था।
 
Arjuna alone protected Duryodhan and other members of the Bharat dynasty during the Ghoshyatra. He alone pleased Lord Shiva with his valour and that fierce and powerful warrior alone defeated all the kings of the Kaurava army (in Viratnagar).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)