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mahabharat 8.31.33: भरतश्रेष्ठ! वह बात अब बीत चुकी है। उसके लिए शोक मत करो। युद्ध का सम्पूर्ण वृत्तांत यथावत् सुनो। मैं उस भयंकर विनाश का वर्णन करता हूँ। 33॥   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  8.31.33 
तत्त्विदानीमतिक्रान्तं मा शुचो भरतर्षभ।
शृणु सर्वं यथावृत्तं घोरं वैशसमुच्यते॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! वह बात अब बीत चुकी है। उसके लिए शोक मत करो। युद्ध का सम्पूर्ण वृत्तांत यथावत् सुनो। मैं उस भयंकर विनाश का वर्णन करता हूँ। 33॥
 
Bharatshrestha! That thing has passed now. Don't mourn for him. Listen to the entire story of the war in its original form. I describe that terrible destruction. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)