श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.31.32 
त्वया पापानि घोराणि समाचीर्णानि पाण्डुषु।
त्वत्कृते वर्तते घोर: पार्थिवानां जनक्षय:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तूने पाण्डवों पर भयंकर अत्याचार किये हैं। तेरे ही कारण राजाओं के हाथों यह भयंकर नरसंहार हो रहा है ॥32॥
 
You have committed terrible atrocities on the Pandavas. It is because of you that this terrible massacre is taking place at the hands of the kings. ॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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