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mahabharat 8.31.3: अपने दिव्य धनुष से सुसज्जित होकर उन्होंने अकेले ही निवातकवों का वध कर दिया तथा अकेले ही किरात रूप में खड़े भगवान महादेव से युद्ध किया।   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.31.3 
एको निवातकवचानहनद् दिव्यकार्मुक:।
एक: किरातरूपेण स्थितं शर्वमयोधयत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अपने दिव्य धनुष से सुसज्जित होकर उन्होंने अकेले ही निवातकवों का वध कर दिया तथा अकेले ही किरात रूप में खड़े भगवान महादेव से युद्ध किया।
 
Armed with his divine bow, he single-handedly killed the Nivatakavas and also single-handedly fought with Lord Mahadeva who was standing in the form of a Kirata.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)