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mahabharat 8.31.22: युद्ध में कर्ण का आश्रय लेकर मूर्ख दुर्योधन पुनः कुन्तीपुत्रों तथा श्रीकृष्ण को उनके पुत्रों सहित परास्त करने के लिए उत्साहित हो उठा।   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.31.22 
कर्णमाश्रित्य संग्रामे मन्दो दुर्योधन: पुन:।
जेतुमुत्सहते पार्थान् सपुत्रान् सहकेशवान्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में कर्ण का आश्रय लेकर मूर्ख दुर्योधन पुनः कुन्तीपुत्रों तथा श्रीकृष्ण को उनके पुत्रों सहित परास्त करने के लिए उत्साहित हो उठा।
 
The foolish Duryodhana, having taken shelter of Karna in the war, was once again enthusiastic about defeating the sons of Kunti and Shri Krishna along with their sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)