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mahabharat 8.31.2: अर्जुन ने अकेले ही सुभद्रा का हरण किया, अकेले ही खाण्डव वन में अग्निदेव को संतुष्ट किया, अकेले ही पृथ्वी को जीता और समस्त राजाओं से कर वसूल किया॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.31.2 
पार्थश्चैकोऽहरद् भद्रामेकश्चाग्निमतर्पयत्।
एकश्चेमां महीं जित्वा चक्रे बलिभृतो नृपान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने अकेले ही सुभद्रा का हरण किया, अकेले ही खाण्डव वन में अग्निदेव को संतुष्ट किया, अकेले ही पृथ्वी को जीता और समस्त राजाओं से कर वसूल किया॥ 2॥
 
Arjuna alone abducted Subhadra, alone satisfied the god of fire in the Khandav forest, and alone conquered the earth and made all kings pay taxes.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)