Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.31.19-20: परमशक्तिशाली कर्ण अकेले ही सृंजय सहित समस्त कुंतीपुत्रों का वध कर सकता है। युद्ध में कर्ण का बल इंद्र और विष्णु के समान है। उसके अस्त्र-शस्त्र भयंकर हैं और उस महामनस्वी योद्धा का पराक्रम भी अद्भुत है।' यह सब सोचकर राजा दुर्योधन युद्ध में कर्ण का साथ पाकर मदमस्त हो गया। | mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परमशक्तिशाली कर्ण अकेले ही सृंजय सहित समस्त कुंतीपुत्रों का वध कर सकता है। युद्ध में कर्ण का बल इंद्र और विष्णु के समान है। उसके अस्त्र-शस्त्र भयंकर हैं और उस महामनस्वी योद्धा का पराक्रम भी अद्भुत है।' यह सब सोचकर राजा दुर्योधन युद्ध में कर्ण का साथ पाकर मदमस्त हो गया।
The powerful Karna alone can kill all the sons of Kunti including Srinjaya. In battle, Karna's strength is equal to that of Indra and Vishnu. His weapons are dreadful and the valour of that great-minded warrior is also amazing.' Thinking all this, King Duryodhana became intoxicated by taking the support of Karna in the battle.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥