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mahabharat 8.31.14-15h: कर्ण युद्ध में इन्द्र के समान वीर, मरुभूमि के योद्धाओं के समान बलवान और कार्तवीर्य अर्जुन के समान पराक्रमी था। राजा दुर्योधन का मन उसकी ओर चला गया। 14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  8.31.14-15h 
पुरंदरसमं युद्धे मरुद्‍गणसमं बले॥ १४॥
कार्तवीर्यसमं वीर्ये कर्णं राज्ञोऽगमन्मन:।
 
 
अनुवाद
कर्ण युद्ध में इन्द्र के समान वीर, मरुभूमि के योद्धाओं के समान बलवान और कार्तवीर्य अर्जुन के समान पराक्रमी था। राजा दुर्योधन का मन उसकी ओर चला गया। 14 1/2॥
 
Karna was as brave in battle as Indra, as strong as the desert warriors and as powerful as Kartavirya Arjuna. King Duryodhana's mind went towards her. 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)