श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.31.1 
धृतराष्ट्र उवाच
स्वेनच्छन्देन न: सर्वानवधीद् व्यक्तमर्जुन:।
न ह्यस्य समरे मुच्येदन्तकोऽप्याततायिन:॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले- संजय! अर्जुन ने निश्चय ही अपनी इच्छा से हमारे सब सैनिकों को मार डाला है। यदि वह युद्धभूमि में शस्त्र उठा ले, तो यमराज भी उसके हाथों से जीवित नहीं बच सकते॥1॥
 
Dhritarashtra said- Sanjay! Arjun has surely killed all our soldiers by his own will. If he takes up arms in the battlefield, even Yamraj cannot escape alive from his hands.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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