श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 30: सात्यकि और कर्णका युद्ध तथा अर्जुनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार और पाण्डवोंकी विजय  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  8.30.44 
ततो रक्ष: पिशाचाश्च श्वापदाश्चैव संघश:।
जग्मुरायोधनं घोरं रुद्रस्याक्रीडसंनिभम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर राक्षस, पिशाच और हिंसक प्राणियों के समूह रुद्र की क्रीड़ास्थली (श्मशान) के समान उस भयंकर युद्धभूमि में पहुँच गए॥44॥
 
Thereafter, demons, vampires and hordes of violent creatures reached that fierce battlefield like Rudra's playground (cremation ground). 44॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि प्रथमे युद्धदिवसे त्रिंशोऽध्याय:॥ ३०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें प्रथम दिनका युद्धविषयक तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)