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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 30: सात्यकि और कर्णका युद्ध तथा अर्जुनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार और पाण्डवोंकी विजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.30.4 
कमलदिनकरेन्दुसंनिभै:
सितदशनै: सुमुखाक्षिनासिक:।
रुचिरमुकुटकुण्डलैर्मही
पुरुषशिरोभिरुपस्तृता बभौ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस समय मानव सिरों से आच्छादित युद्धभूमि अत्यंत शोभायमान हो रही थी। वीरों के कटे हुए सिर कमल, सूर्य और चन्द्रमा के समान चमक रहे थे। उनके श्वेत दाँत चमक रहे थे। उनके मुख, नेत्र और नासिकाएँ भी अत्यंत सुंदर थीं और वे सुंदर मुकुटों और कुण्डलों से सुशोभित थे।
 
At that time, the battlefield covered with human heads was looking very beautiful. The severed heads of the heroes were shining like lotus, sun and moon. Their white teeth were shining. Their faces, eyes and noses were also very beautiful and they were adorned with beautiful crowns and earrings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)