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mahabharat 8.30.24: उस समय कर्ण युद्धभूमि में क्रोध में भरे हुए इन्द्र के समान अनेक बाणों की वर्षा करके शत्रुओं का संहार कर रहा था; परंतु ऐसा करते समय उसे न तो पीड़ा हुई और न ही थकान हुई ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 8.30: सात्यकि और कर्णका युद्ध तथा अर्जुनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार और पाण्डवोंकी विजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.30.24 
न ग्लानिरासीत् कर्णस्य
क्षिपत: सायकान् बहून्।
रणे विनिघ्नत: शत्रून्
क्रुद्धस्येव शतक्रतो:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस समय कर्ण युद्धभूमि में क्रोध में भरे हुए इन्द्र के समान अनेक बाणों की वर्षा करके शत्रुओं का संहार कर रहा था; परंतु ऐसा करते समय उसे न तो पीड़ा हुई और न ही थकान हुई ॥24॥
 
At that time Karna was killing his enemies on the battlefield like Indra in a fit of rage by showering many arrows; but he did not feel any pain or fatigue in doing this. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)