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mahabharat 8.3.20: उसके धनुष से छूटे सैकड़ों बाण, जो आगे और पीछे एक दूसरे को छू रहे थे, मधुमक्खियों की पंक्तियों की तरह प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.3: दुर्योधनके द्वारा सेनाको आश्वासन देना तथा सेनापति कर्णके युद्ध और वधका संक्षिप्त वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.3.20 
तस्येषुधारा: शतश: प्रादुरासञ्छरासनात्।
अग्रे पुङ्खे च संसक्ता यथा भ्रमरपङ्‍‍क्तय:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उसके धनुष से छूटे सैकड़ों बाण, जो आगे और पीछे एक दूसरे को छू रहे थे, मधुमक्खियों की पंक्तियों की तरह प्रतीत हो रहे थे।
 
Hundreds of arrows shot from his bow, each touching the other at the front and the tail, appeared like rows of bees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)