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mahabharat 8.3.2: प्रजानाथ! सब शस्त्रधारी सैनिक शोक से व्याकुल हो गए, उनके मुख नीचे झुक गए। वे न तो एक-दूसरे की ओर देखते थे और न एक-दूसरे से बोलते थे॥2॥   |   mahabharat अध्याय 8.3: दुर्योधनके द्वारा सेनाको आश्वासन देना तथा सेनापति कर्णके युद्ध और वधका संक्षिप्त वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 3: दुर्योधनके द्वारा सेनाको आश्वासन देना तथा सेनापति कर्णके युद्ध और वधका संक्षिप्त वृत्तान्त  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.3.2 
अवाङ्मुखा: शस्त्रभृत: सर्व एव विशाम्पते।
अप्रेक्षमाणा: शोकार्ता नाभ्यभाषन् परस्परम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! सब शस्त्रधारी सैनिक शोक से व्याकुल हो गए, उनके मुख नीचे झुक गए। वे न तो एक-दूसरे की ओर देखते थे और न एक-दूसरे से बोलते थे॥2॥
 
Prajanath! All the armed soldiers were distraught with grief, with their faces lowered. They neither looked at each other nor spoke to each other.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)