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mahabharat 8.3.11: जिसके भय से कुन्ती का मूर्ख पुत्र अर्जुन सदैव अपना मुख फेर लेता है, जैसे छोटा हिरण सिंह के सामने से भाग जाता है।   |   mahabharat अध्याय 8.3: दुर्योधनके द्वारा सेनाको आश्वासन देना तथा सेनापति कर्णके युद्ध और वधका संक्षिप्त वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.3.11 
यस्य वै युधि संत्रासात् कुन्तीपुत्रो धनंजय:।
निवर्तते सदा मन्द: सिंहात् क्षुद्रमृगो यथा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जिसके भय से कुन्ती का मूर्ख पुत्र अर्जुन सदैव अपना मुख फेर लेता है, जैसे छोटा हिरण सिंह के सामने से भाग जाता है।
 
Due to fear of whom, Kunti's foolish son Arjun always turns his face away, just like a small deer flees from before a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)