Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.29.5-6h: संजय ने कहा - हे प्रजानाथ! जब सारी सेनाएँ भिन्न-भिन्न भागों में बँटकर लड़ने और मरने लगीं, तब दूसरे रथ पर बैठा आपका पुत्र दुर्योधन विषैले सर्प के समान अत्यन्त क्रोधित हो उठा।   |   mahabharat अध्याय 8.29: युधिष्ठिरके द्वारा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 29: युधिष्ठिरके द्वारा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  8.29.5-6h 
संजय उवाच
संसक्तेषु तु सैन्येषु वध्यमानेषु भागश:।
रथमन्यं समास्थाय पुत्रस्तव विशाम्पते॥ ५॥
क्रोधेन महता युक्त: सविषो भुजगो यथा।
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - हे प्रजानाथ! जब सारी सेनाएँ भिन्न-भिन्न भागों में बँटकर लड़ने और मरने लगीं, तब दूसरे रथ पर बैठा आपका पुत्र दुर्योधन विषैले सर्प के समान अत्यन्त क्रोधित हो उठा।
 
Sanjaya said - O Prajanath! When all the armies got divided into different parts and started fighting and dying, then your son Duryodhan, sitting on another chariot, became very angry like a poisonous snake. 5 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)