श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 29: युधिष्ठिरके द्वारा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.29.32 
रथस्थ: स तया विद्धो वर्म भित्त्वा स्तनान्तरे।
भृशं संविग्नहृदय: पपात च मुमोह च॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जब दुर्योधन रथ पर बैठा था, तभी अस्त्र ने उसकी छाती में वार किया और उसका कवच फाड़ दिया। दुर्योधन अत्यंत व्यथित होकर गिर पड़ा और अचेत हो गया।
 
While Duryodhan was sitting on the chariot, the weapon pierced his chest, tearing his armour. Duryodhan was extremely distressed and fell down and became unconscious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)