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mahabharat 8.29.24-25h: वह स्वर्ण-दण्ड धारण करने वाली शक्ति आकाश से एक विशाल उल्का के समान तीव्र ध्वनि के साथ नीचे गिरी। उस समय वह अग्नि के समान चमक रही थी।   |   mahabharat अध्याय 8.29: युधिष्ठिरके द्वारा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 29: युधिष्ठिरके द्वारा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  8.29.24-25h 
निपपात तत: साऽथ स्वर्णदण्डा महास्वना॥ २४॥
निपतन्ती महोल्केव व्यराजच्छिखिसंनिभा।
 
 
अनुवाद
वह स्वर्ण-दण्ड धारण करने वाली शक्ति आकाश से एक विशाल उल्का के समान तीव्र ध्वनि के साथ नीचे गिरी। उस समय वह अग्नि के समान चमक रही थी।
 
That Shakti with the golden staff fell from the sky like a huge meteor with a loud noise. At that time she was shining like fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)