तामापतन्तीं सहसा धर्मराज: शितै: शरै:॥ २३॥
त्रिभिश्चिच्छेद सहसा तं च विव्याध पञ्चभि:।
अनुवाद
अचानक अपनी ओर आती हुई उस शक्ति को धर्मराज युधिष्ठिर ने तीन तीखे बाणों से काट डाला तथा दुर्योधन को भी पाँच बाणों से घायल कर दिया।
Suddenly that power coming towards him was cut by Dharmaraja Yudhishthira with three sharp arrows and he also injured Duryodhan with five arrows. 23 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥