| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 29: युधिष्ठिरके द्वारा दुर्योधनकी पराजय » श्लोक 10-11 |
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| | | | श्लोक 8.29.10-11  | तौ समाजग्मतुर्वीरौ भ्रातरौ रथसत्तमौ॥ १०॥
समेत्य च महावीरौ संरब्धौ युद्धदुर्मदौ।
ववर्षतुर्महेष्वासौ शरैरन्योन्यमाहवे॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार वे महान धनुर्धर, वीर योद्धा और महारथी ये दोनों वीर भाई एक दूसरे के आमने-सामने आ गये और क्रोध में भरकर आपस में भिड़ गये और युद्धस्थल में एक दूसरे पर बाणों की वर्षा करने लगे। | | | | Thus, those great archers, brave warriors and great warriors, both these brave brothers came face to face with each other and clashed with each other in anger and started showering arrows on each other on the battlefield. | | ✨ ai-generated | | |
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