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mahabharat 8.28.46-47: राजा ! क्षण भर में ही पृथ्वी टूटे हुए रथों, गिरे हुए हाथियों, मरे हुए घोड़ों और गिरे हुए पैदल सैनिकों से इतनी भर गई कि वहाँ चलना-फिरना असम्भव हो गया ॥46-47॥   |   mahabharat अध्याय 8.28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 46-47
 
 
श्लोक  8.28.46-47 
रथैर्भग्नैर्महाराज वारणैश्च निपातितै:॥ ४६॥
हयैश्च पतितैस्तत्र नरैश्च विनिपातितै:।
अगम्यरूपा पृथिवी क्षणेन समपद्यत॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
राजा ! क्षण भर में ही पृथ्वी टूटे हुए रथों, गिरे हुए हाथियों, मरे हुए घोड़ों और गिरे हुए पैदल सैनिकों से इतनी भर गई कि वहाँ चलना-फिरना असम्भव हो गया ॥46-47॥
 
King! Within a moment the earth became so full of broken chariots, fallen elephants, dead horses and fallen foot soldiers that it became impossible to walk or move around there. ॥ 46-47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)