Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.28.44-45h: हे राजन! योद्धा बाणों से इतने व्याकुल हो रहे थे कि अपने और पराये का भेद करना कठिन हो रहा था। विजय चाहने वाले राजा युद्ध करना अपना कर्तव्य समझकर युद्ध कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  8.28.44-45h 
नैव स्वे न परे राजन् विज्ञायन्ते शरातुरा:॥ ४४॥
योद्धव्यमिति युध्यन्ते राजानो जयगृद्धिन:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! योद्धा बाणों से इतने व्याकुल हो रहे थे कि अपने और पराये का भेद करना कठिन हो रहा था। विजय चाहने वाले राजा युद्ध करना अपना कर्तव्य समझकर युद्ध कर रहे थे।
 
O King! The warriors were so troubled by the arrows that it was difficult to distinguish between our own and those who were strangers. The kings who desired victory were fighting, thinking that it was their duty to fight.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)