श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  8.28.43-44h 
एवमेतन्महद् युद्धं दारुणे शस्त्रसंकुलम्॥ ४३॥
उन्मत्तगङ्गाप्रतिमं शब्देनापूरयज्जगत‍्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अस्त्र-शस्त्रों से युक्त यह भयंकर युद्ध जगत को उफनती गंगा के समान कोलाहल से भर रहा था।
 
Thus this terrible war filled with weapons was filling the world with noise like the rising Ganges. 43 1/2
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd