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श्लोक 8.28.43-44h  |
एवमेतन्महद् युद्धं दारुणे शस्त्रसंकुलम्॥ ४३॥
उन्मत्तगङ्गाप्रतिमं शब्देनापूरयज्जगत्। |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार अस्त्र-शस्त्रों से युक्त यह भयंकर युद्ध जगत को उफनती गंगा के समान कोलाहल से भर रहा था। |
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| Thus this terrible war filled with weapons was filling the world with noise like the rising Ganges. 43 1/2 |
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