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mahabharat 8.28.40-41h: कुछ योद्धा युद्ध में लगे हुए दूसरे योद्धा से अनभिज्ञ होकर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग करके युद्ध में उसके प्राण ले लेते थे ॥40 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  8.28.40-41h 
समासक्तस्य चान्येन अविज्ञातस्तथापर:॥ ४०॥
जहार समरे प्राणान् नानाशस्त्रैरनेकधा।
 
 
अनुवाद
कुछ योद्धा युद्ध में लगे हुए दूसरे योद्धा से अनभिज्ञ होकर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग करके युद्ध में उसके प्राण ले लेते थे ॥40 1/2॥
 
Some warriors, unaware of the other soldier engaged in the battle, would take his life in the battle by using various kinds of weapons. ॥ 40 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)