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mahabharat 8.28.37-38h: दूसरा योद्धा अपने दोनों हाथ उठाकर शत्रु को जमीन पर पटक देता और फिर एक पैर से उसकी छाती दबाता तथा संघर्ष करते हुए भी उसका सिर काट देता।   |   mahabharat अध्याय 8.28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  8.28.37-38h 
उद्यम्य च भुजावन्यो निक्षिप्य च महीतले॥ ३७॥
पदा चोर: समाक्रम्य स्फुरतोऽपाहरच्छिर:।
 
 
अनुवाद
दूसरा योद्धा अपने दोनों हाथ उठाकर शत्रु को जमीन पर पटक देता और फिर एक पैर से उसकी छाती दबाता तथा संघर्ष करते हुए भी उसका सिर काट देता।
 
The other warrior would raise both his arms and throw the enemy to the ground with them and then press his chest with one foot and cut off his head even though he was struggling. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)