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mahabharat 8.28.28-29: बहुत से योद्धा हाथियों द्वारा पकड़कर उनके दाँतों से मार डाले जाते थे। महाराज! बहुत से विशाल हाथी सेना में घुसकर अचानक बहुत से पैदल सैनिकों को पकड़ लेते और बार-बार पटक-पटक कर उनके शरीर को चूर-चूर कर देते तथा युद्ध में उन्हें थाली की तरह फेंककर मार डालते।   |   mahabharat अध्याय 8.28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  8.28.28-29 
अपरे सहसा गृह्य विषाणैरेव सूदिता:।
सेनान्तरं समासाद्य केचित् तत्र महागजै:॥ २८॥
क्षुण्णगात्रा महाराज विक्षिप्य च पुन: पुन:।
अपरे व्यजनानीव विभ्राम्य निहता मृधे॥ २९॥
 
 
अनुवाद
बहुत से योद्धा हाथियों द्वारा पकड़कर उनके दाँतों से मार डाले जाते थे। महाराज! बहुत से विशाल हाथी सेना में घुसकर अचानक बहुत से पैदल सैनिकों को पकड़ लेते और बार-बार पटक-पटक कर उनके शरीर को चूर-चूर कर देते तथा युद्ध में उन्हें थाली की तरह फेंककर मार डालते।
 
Many warriors were caught by the elephants and killed by their teeth. Maharaj! Many huge elephants would enter the army and suddenly catch many infantry and smash their bodies by repeatedly slamming them and would kill many in the battle by throwing them like dishes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)