श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.28.27 
अपरे हस्तिभिर्हस्तै: खं विक्षिप्ता महाहवे।
निपतन्तो विषाणाग्रैर्भृशं विद्धा: सुशिक्षितै:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस महायुद्ध में बहुत से पैदल सैनिक सुशिक्षित हाथियों की सूँडों से आकाश में उछल गए और वहाँ से गिरते समय उन हाथियों के दाँतों से बुरी तरह घायल हो गए॥27॥
 
In that great war many infantry soldiers were thrown into the sky by the trunks of well-trained elephants, and while falling from there they were severely torn by the tusks of those elephants.॥27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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