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mahabharat 8.28.19-20: बहुत से घुड़सवार उन उत्तम हाथियों को चारों ओर से घेरकर इधर-उधर तालियाँ बजाते हुए दौड़ने लगे। अतः जब वे विशाल हाथी भागने लगे, तब घुड़सवार उन पर पीछे और बगल से बाणों से आक्रमण करने लगे॥19-20॥   |   mahabharat अध्याय 8.28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  8.28.19-20 
हयारोहाश्च बहव: परिवार्य गजोत्तमान्।
तलशब्दरवांश्चक्रु: सम्पतन्तस्ततस्तत:॥ १९॥
धावमानांस्ततस्तांस्तु द्रवमाणान् महागजान्।
पार्श्वत: पृष्ठतश्चैव निजघ्नुर्हयसादिन:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
बहुत से घुड़सवार उन उत्तम हाथियों को चारों ओर से घेरकर इधर-उधर तालियाँ बजाते हुए दौड़ने लगे। अतः जब वे विशाल हाथी भागने लगे, तब घुड़सवार उन पर पीछे और बगल से बाणों से आक्रमण करने लगे॥19-20॥
 
Many horsemen surrounded the excellent elephants from all sides and started running here and there and clapping their hands. So when those huge elephants started running and fleeing, the horsemen would attack them with arrows from the sides and from behind.॥19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)