श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.28.18 
नागा हयान् समासाद्य विक्षिपन्तो बहून् रणे।
दारयामासुरत्युग्रं तत्र तत्र तदा तदा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हाथियों ने बहुत से घोड़ों को पकड़कर युद्धस्थल में इधर-उधर पटकना और फाड़ना आरम्भ कर दिया। इससे उस समय वहाँ बड़ा भयानक दृश्य उत्पन्न हो गया॥18॥
 
The elephants caught hold of many horses and began throwing them here and there on the battlefield and tearing them apart. This created a very terrifying scene there at that time.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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