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mahabharat 8.28.16: महाराज! वह युद्ध कुछ क्षण तक देखने में तो अच्छा लगता था, फिर लोग पागलों की तरह अभद्र व्यवहार करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.28.16 
मुहूर्तमेव तद् युद्धमासीन्मधुरदर्शनम्।
तत उन्मत्तवद् राजन् निर्मर्यादमवर्तत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वह युद्ध कुछ क्षण तक देखने में तो अच्छा लगता था, फिर लोग पागलों की तरह अभद्र व्यवहार करने लगे।
 
King! That battle seemed pleasant to watch for only a few moments. Then the people started behaving in an indecent manner like a madman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)