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श्लोक 8.28.1  |
संजय उवाच
युधिष्ठिरं महाराज विसृजन्तं शरान् बहून्।
स्वयं दुर्योधनो राजा प्रत्यगृह्णादभीतवत्॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| संजय कहते हैं - महाराज! राजा दुर्योधन स्वयं निर्भय योद्धा की भाँति अनेक बाणों की वर्षा करते हुए युधिष्ठिर के सामने आ खड़ा हुआ ॥1॥ |
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| Sanjaya says - Maharaj! King Duryodhana himself confronted Yudhishthira like a fearless warrior, showering many arrows. ॥1॥ |
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