Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.27.7: जैसे पतंगे जलते हुए भी अग्नि में गिर जाते हैं, उसी प्रकार पाण्डुकुमार अर्जुन को छोड़कर वे सभी योद्धा युद्धभूमि में मारे जाने पर भी युद्धभूमि से बचकर नहीं निकल सके। | mahabharat अध्याय 8.27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते हन्यमाना: समरे नाजहु: पाण्डवं रणे।
हन्यमाना महाराज शलभा इव पावकम्॥ ७॥
अनुवाद
जैसे पतंगे जलते हुए भी अग्नि में गिर जाते हैं, उसी प्रकार पाण्डुकुमार अर्जुन को छोड़कर वे सभी योद्धा युद्धभूमि में मारे जाने पर भी युद्धभूमि से बचकर नहीं निकल सके।
Just as moths fall in the fire even though they are burning, similarly all those warriors, despite being killed on the battlefield, could not escape from the battle field except Pandukumar (son of the Pandava) Arjun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥