Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.27.42-43: उस समय युद्धस्थल में उन असंख्य संशप्तकों को पराजित करके विजयी कुन्तीपुत्र अर्जुन धूमरहित प्रज्वलित अग्नि के समान शोभा पा रहे थे ॥42-43॥   |   mahabharat अध्याय 8.27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  8.27.42-43 
ताञ्जित्वा समरे जिष्णु: संशप्तकगणान् बहून्॥ ४२॥
विरराज तदा पार्थो विधूमोऽग्निरिव ज्वलन्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस समय युद्धस्थल में उन असंख्य संशप्तकों को पराजित करके विजयी कुन्तीपुत्र अर्जुन धूमरहित प्रज्वलित अग्नि के समान शोभा पा रहे थे ॥42-43॥
 
At that time, after defeating those numerous Samshaptakas in the battle-field, victorious Kunti's son Arjuna was looking like a smokeless blazing fire. ॥42-43॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि संशप्तकजये सप्तविंशोध्याय:॥ २७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें संशप्तकोंकी पराजयविषयक सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)