उस समय युद्धस्थल में उन असंख्य संशप्तकों को पराजित करके विजयी कुन्तीपुत्र अर्जुन धूमरहित प्रज्वलित अग्नि के समान शोभा पा रहे थे ॥42-43॥
At that time, after defeating those numerous Samshaptakas in the battle-field, victorious Kunti's son Arjuna was looking like a smokeless blazing fire. ॥42-43॥
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि संशप्तकजये सप्तविंशोध्याय:॥ २७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें संशप्तकोंकी पराजयविषयक सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥