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mahabharat 8.27.37-38h: युद्धभूमि में टूटे हुए पर्वतों की तरह गिरे हुए हाथियों और घोड़ों के कारण भूमि पर चलना असम्भव हो गया था।   |   mahabharat अध्याय 8.27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  8.27.37-38h 
हस्तिभि: पतितैश्चैव तुरङ्गैश्चाभवन्मही॥ ३७॥
अगम्यरूपा समरे विशीर्णैरिव पर्वतै:।
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में टूटे हुए पर्वतों की तरह गिरे हुए हाथियों और घोड़ों के कारण भूमि पर चलना असम्भव हो गया था।
 
It had become impossible to walk on the ground because of the elephants and horses that had fallen down like broken mountains in the battlefield. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)