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mahabharat 8.27.34-35h: पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर सिर, पृथ्वी पर गिरती हुई बालियाँ और सुन्दर आँखें, आकाश में तारों के समूह के समान दिख रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 8.27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  8.27.34-35h 
सकुण्डलानि स्वक्षीणि पूर्णचन्द्रनिभानि च॥ ३४॥
शिरांस्युर्व्यामदृश्यन्त ताराजालमिवाम्बरे।
 
 
अनुवाद
पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर सिर, पृथ्वी पर गिरती हुई बालियाँ और सुन्दर आँखें, आकाश में तारों के समूह के समान दिख रही थीं।
 
The beautiful head, like the full moon, with its earrings falling on the earth and beautiful eyes, looked like a cluster of stars in the sky. 34 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)