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mahabharat 8.27.28-34h: प्रजानाथ! तब वहाँ हजारों बाण प्रकट होने लगे। हे प्रजा की रक्षा करने वाले राजा, आदरणीय भरतवंशी! उस समय रणभूमि में सर्वत्र ध्वजाएँ, धनुष, रथ, पताकाएँ, तरकस, जूए, धुरे, पहिए, जूआ, लगाम, कुबेर, वरूथ (रथ का चर्म आवरण), बाण, घोड़े, प्रास, ऋष्टि, गदा, परिघ, शक्ति, तोमर, कमरबंद, चक्रयुक्त शतघ्नी, बाहु-जांघ, गले के धागे, अंगद, बाजूबंद, हार, हार, हार, बाजूबंद, कवच, छत्र, थाल और मुकुटधारी सिरों के गिरने की ध्वनि सुनाई देने लगी।   |   mahabharat अध्याय 8.27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 28-34h
 
 
श्लोक  8.27.28-34h 
तत: शरसहस्राणि प्रादुरासन् विशाम्पते॥ २८॥
ध्वजानां छिद्यमानानां कार्मुकाणां च मारिष।
रथानां सपताकानां तूणीराणां युगै: सह॥ २९॥
अक्षाणामथ चक्राणां योक्त्राणां रश्मिभि: सह।
कूबराणां वरूथाणां पृषत्कानां च संयुगे॥ ३०॥
अश्वानां पततां चापि प्रासानामृष्टिभि: सह।
गदानां परिघानां च शक्तितोमरपट्टिशै:॥ ३१॥
शतघ्नीनां सचक्राणां भुजानां चोरुभि: सह।
कण्ठसूत्राङ्गदानां च केयूराणां च मारिष॥ ३२॥
हाराणामथ निष्काणां तनुत्राणां च भारत।
छत्राणां व्यजनानां च शिरसां मुकुटै: सह॥ ३३॥
अश्रूयत महाञ्शब्दस्तत्र तत्र विशाम्पते।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! तब वहाँ हजारों बाण प्रकट होने लगे। हे प्रजा की रक्षा करने वाले राजा, आदरणीय भरतवंशी! उस समय रणभूमि में सर्वत्र ध्वजाएँ, धनुष, रथ, पताकाएँ, तरकस, जूए, धुरे, पहिए, जूआ, लगाम, कुबेर, वरूथ (रथ का चर्म आवरण), बाण, घोड़े, प्रास, ऋष्टि, गदा, परिघ, शक्ति, तोमर, कमरबंद, चक्रयुक्त शतघ्नी, बाहु-जांघ, गले के धागे, अंगद, बाजूबंद, हार, हार, हार, बाजूबंद, कवच, छत्र, थाल और मुकुटधारी सिरों के गिरने की ध्वनि सुनाई देने लगी।
 
Prajanath! Then thousands of arrows started appearing there. Respectable Bharatvanshi, the king who protects his people! At that time, the sound of falling flags, bows, chariots, banners, quivers, yokes, axles, wheels, yoke, reins, kuber, varuth (leather covering of the chariot), arrows, horses, prasa, rishti, mace, parigha, shakti, tomar, sash, chakra-equipped shataghni, arms-thighs, neck threads, angad, armlets, necklaces, necklaces, necklaces, armlets, armour, umbrellas, dishes and heads with crowns started to be heard everywhere in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)